“मकर संक्रांति की तिथि के चारों ओर बनी उलझन – 14 या 15 जनवरी – इस विस्तृत लेख में सुलझा दी गई है।”

Om Sharma
By Om Sharma 4 Min Read

JANUARY 13, 2024

“काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष, प्रो. विनय कुमार पांडेय ने ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का अर्थ बताया है कि इसका मतलब होता है सूर्य या किसी भी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश या संक्रमण। उनके अनुसार, सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इसे ‘मकर संक्रांति’ कहा जाता है। संक्रांति के समय, 20 घंटे पूर्व और 20 घंटे पश्चात पुण्यकाल होता है।”

“मकर संक्रांति 2024: इस साल, मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेगा, तो इसका सूर्य उत्तरायण होगा और साथ ही खरमास भी समाप्त होगा। 16 जनवरी से आगे, विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए अच्छे मुहूर्तों की शुरुआत होगी। प्रकाश के भक्त और कृषि पर आधारित भारतीय संस्कृति के अनुयायी इसे एक उल्लासपूर्ण पर्व के रूप में मनाते हैं।”

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“यह पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार आदि राज्यों में खिचड़ी, पंजाब में लोहड़ी, राजस्थान व गुजरात में उत्तरायण, असम में माघ बिहू, उत्तराखंड में घुघली या खिचड़ी संक्रांति तो दक्षिण भारत में पोंगल नाम से मनाया जाता है। काशी ह‍िंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का अर्थ सूर्य या किसी भी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश या संक्रमण है। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति कहलाता है। संक्रांति के समय से 20 घटी (आठ घंटा) पूर्व और 20 घटी (आठ घंटा) पश्चात तक पुण्यकाल होता है। इस अवधि में तीर्थादि में स्नान-दान का विधान है। इस वर्ष सूर्य 15 जनवरी को सुबह 9:13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।”

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“उत्तरायण: देवताओं का आदित्यिक दिन”

“मकर संक्रांति का प्रभातकाल, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देवताओं का दिन, और दक्षिणायन देवताओं की रात्रि होती है। इस महत्वपूर्ण तिथि पर स्नान, दान, जप, तप, और श्राद्ध-अनुष्ठान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति पर किया गया दान 100 गुना होता है और गंगा, प्रयागराज, और निकटवर्ती पवित्र नदियों-सरोवरों, कुंडों में स्नान कर अर्घ्य और दान का विशेष महत्व है।”

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“आदित्य स्तुति: सूर्य सहस्त्रनाम और आदित्य हृदय स्त्रोत”

“शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन स्नान के बाद सूर्य सहस्त्रनाम, आदित्य हृदय स्त्रोत, सूर्य चालीसा, सूर्य मंत्र आदि का पाठ करके सूर्य की आराधना करनी चाहिए। इस विशेष दिन पर गुड़, तिल, कंबल, खिचड़ी, चावल आदि को पुरोहितों या गरीबों को दान करना उत्तम है। वायु पुराण में मकर संक्रांति पर तांबूल दान का विशेष महत्व है।”

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